किसी दर्दमंद के काम आ


किसी दर्दमंद के काम आ 
किसी डूबते को उछाल दे
 यह निगाहें मस्त की मस्तियां 
किसी बदनसीब पर डाल दे 

मुझे मस्जिदों की खबर नहीं 
मुझे मंदिरों का पता नहीं 
मेरी आजिज़ी को क़ुबूल कर 
मुझे और दर्दो मलाल दे

यह मेहकशी का गुरूर है 
यह मेरे दिल का सुरूर है 
मेरे मयकदा को दोआम हो
 मेरे साक़ीयों को जमाल दे

मैं तेरे विसाल को क्या करूं 
मेरी वहशतों की यह मौत है
हो तेरा जुनूँ मुझ पर अता 
मुझे जन्नतों से निकाल दे

मुझे जिंदगी की तलब नहीं 
मुझे सौ बरस की हवस नहीं
मेरे कलां को महू कर
 वह फना जो है लाज़वाल कर